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रायपुर के समाज के सबसे लोकप्रिय और सच्चे युवा समाजसेवी विकास रूपरेला जी

**कुछ लोग अपने पद से पहचाने जाते हैं…

और कुछ लोग अपने कर्मों से।
आदरणीय श्री विकास रुपरेला जी उन्हीं चुनिंदा व्यक्तित्वों में से एक हैं।**

सहयोग एक सामाजिक संस्था के “उड़ान — नाम ही पहचान है” कार्यक्रम में ऐसे व्यक्तित्व का स्वागत और सम्मान करना हमारे लिए गर्व का विषय है, जिनकी पहचान केवल उनके पद, व्यवसाय या संस्थागत जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है।

आदरणीय श्री विकास रुपरेला जी, विकास टेंट एजेंसी के संचालक होने के साथ-साथ समाज की विभिन्न संस्थाओं से जुड़े हुए हैं और अनेक सामाजिक संस्थानों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हैं। लेकिन उनकी सबसे खास बात यह है कि यदि उनके पदों और जिम्मेदारियों को एक तरफ रख दिया जाए, तब भी उनकी अपनी एक अलग पहचान दिखाई देती है—एक संवेदनशील इंसान, समाज के प्रति समर्पित व्यक्तित्व और दुर्लभ चीजों के अद्भुत संग्रहकर्ता के रूप में।

विकास जी के व्यक्तित्व का एक बेहद रोचक और अनोखा पहलू है—संग्रह करने का उनका जुनून।

आज जब अधिकांश लोग आधुनिक तकनीक और डिजिटल दुनिया में खोते जा रहे हैं, वहीं विकास जी ने इतिहास की उन यादों को संभालकर रखा है, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां शायद केवल किताबों या इंटरनेट पर ही देख पाएंगी।

उनके पास 1947 का अखबार सुरक्षित है। सोचिए, जिस दौर में हमारा देश स्वतंत्रता की नई सुबह देख रहा था, उस दौर की एक ऐतिहासिक छाप आज भी उनके संग्रह में सुरक्षित है। यह केवल एक पुराना अखबार नहीं, बल्कि इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज है।

उनका संग्रह यहीं समाप्त नहीं होता।

विकास जी ग्रामोफोन और पुराने रिकॉर्ड्स के भी संग्रहकर्ता हैं। पुराने गीतों और संगीत से जुड़ी वस्तुओं को सहेजना उनके लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि बीते हुए दौर की संस्कृति और यादों को सुरक्षित रखने जैसा है।

इसी तरह पुराने टेप और कैसेट्स का भी उनका एक समृद्ध संग्रह है। जिस दौर में संगीत कैसेट के माध्यम से घर-घर पहुंचता था, उस दौर की यादों को उन्होंने आज भी संभालकर रखा है।

उनके संग्रह की दुनिया और भी दिलचस्प है।

दुनिया के अलग-अलग देशों की करेंसी और सिक्कों का विशाल संग्रह उनके पास मौजूद है। अलग-अलग देशों की मुद्राएं केवल कागज और धातु के टुकड़े नहीं होतीं; उनके पीछे किसी देश का इतिहास, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और समय की कहानी छिपी होती है। विकास जी ने इन कहानियों को भी अपने संग्रह के माध्यम से संजोकर रखा है।

यही वजह है कि रायपुर में उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में भी जाना जाता है, जिनके पास पुरानी और दुर्लभ वस्तुओं को सहेजने की अद्भुत क्षमता और जुनून है।

लेकिन विकास रुपरेला जी की सबसे बड़ी विशेषता उनके संग्रह नहीं हैं।

उनकी सबसे बड़ी पहचान है—उनकी सोच और उनका सेवा करने का तरीका।

समाजसेवा करने वाले बहुत से लोग अपने कार्यों को लोगों तक पहुंचाते हैं, अपने कार्यक्रमों की तस्वीरें साझा करते हैं और अपने योगदान की जानकारी देते हैं। लेकिन विकास जी का स्वभाव इससे बिल्कुल अलग है।

वे जो करते हैं, उसे बताने में विश्वास नहीं रखते।

वे चुपचाप मदद करने में विश्वास रखते हैं।

उनके लिए समाजसेवा किसी प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। जरूरतमंद की मदद हो, सामाजिक गतिविधि हो या किसी संस्था के लिए सहयोग—विकास जी अपनी भूमिका निभाते हैं, लेकिन उसके बदले चर्चा या प्रशंसा की अपेक्षा नहीं रखते।

उनके व्यक्तित्व की सबसे खूबसूरत बात शायद यही है कि वे मानते हैं—

“फोटो नहीं, कार्य देखना चाहिए।”

यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि उनके जीवन जीने की सोच को दर्शाता है।

विकास जी उन लोगों में से हैं जो मंच पर कम और समाज के बीच ज्यादा दिखाई देते हैं। वे अपने काम का ढिंढोरा पीटने के बजाय काम को ही अपनी पहचान बनने देते हैं।

शायद यही कारण है कि उनके बारे में जितना जाना जाता है, उससे कहीं ज्यादा ऐसा है जो उन्होंने कभी बताया ही नहीं।

उनकी सामाजिक सक्रियता, संस्थाओं से जुड़ाव और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता यह बताती है कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद से नहीं होती।

पद आपको जिम्मेदारी देता है,
लेकिन कर्म आपको पहचान देते हैं।

विकास जी के पास पद भी हैं, व्यवसाय भी है, सामाजिक दायित्व भी हैं और एक अद्भुत संग्रह भी है—लेकिन इन सबके ऊपर उनका एक ऐसा व्यक्तित्व है, जो बिना शोर किए अपना काम करता है।

उनके संग्रह हमें इतिहास से जोड़ते हैं, उनकी सामाजिक सक्रियता हमें वर्तमान से जोड़ती है और उनकी सेवा की सोच हमें यह सिखाती है कि अच्छा काम करने के लिए हमेशा मंच की जरूरत नहीं होती।

कभी-कभी सबसे बड़ा काम वही होता है, जिसकी कोई तस्वीर नहीं होती।

कभी-कभी सबसे बड़ी मदद वही होती है, जिसकी कोई घोषणा नहीं होती।

और कभी-कभी सबसे मजबूत पहचान वही होती है, जिसे बनाने के लिए व्यक्ति ने पहचान बनाने की कोशिश ही नहीं की होती।

आदरणीय श्री विकास रुपरेला जी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं—
जिनकी पहचान उनके पदों से नहीं,
उनके कर्मों से बनती है।

सहयोग एक सामाजिक संस्था के “उड़ान — नाम ही पहचान है” जैसे मंच पर उनका सम्मान इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह सम्मान केवल एक व्यवसायी या सामाजिक संस्था से जुड़े पदाधिकारी का सम्मान नहीं है।

यह सम्मान है—

एक ऐसे इंसान का, जो इतिहास को संभालकर रखता है,
समाज के लिए चुपचाप खड़ा रहता है,
दुर्लभ चीजों को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाता है,
और अपने अच्छे कार्यों का हिसाब दुनिया को नहीं देता।

आज जब हम कहते हैं—

“उड़ान — नाम ही पहचान है”

तो विकास रुपरेला जी इस पंक्ति का एक अलग ही अर्थ सामने रखते हैं।

क्योंकि कुछ लोग अपनी उड़ान की ऊंचाई बताते हैं,
और कुछ लोग बिना बताए दूसरों के सफर को आसान बनाते रहते हैं।

विकास जी की यही सादगी, यही संग्रह के प्रति जुनून, यही सामाजिक सोच और सबसे बढ़कर बिना प्रचार के सेवा करने की भावना उन्हें भीड़ से अलग पहचान देती है।

आदरणीय श्री विकास रुपरेला जी,
आपका सम्मान केवल एक सम्मान नहीं—
उन तमाम अनकहे कार्यों को सलाम है,
जिनकी तस्वीर शायद कहीं नहीं,
लेकिन जिनका असर समाज में जरूर दिखाई देता है।

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