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सहयोग एक सामाजिक संस्था का सोलहवा कार्यक्रम हौसले वाली मां हुआ संपन्न

‘हौसले वाली माँ’ कार्यक्रम ने रचा इतिहास, 39 परिवारों का सम्मान

माताओं के संघर्ष की कहानियों ने नम कीं आंखें, जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए समाजसेवियों ने बढ़ाए हाथ

रायपुर। सहयोग एक सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित ‘हौसले वाली माँ’ कार्यक्रम बेहद भावनात्मक, प्रेरणादायी और यादगार रहा। कार्यक्रम में कुल 39 परिवारों ने सहभागिता की। इन परिवारों की माताओं को उनके संघर्ष, साहस और परिवार के प्रति समर्पण के लिए फ्रेमयुक्त सम्मान-पत्र, स्वीट एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि सम्मानित माताओं को मंच पर अपने जीवन के संघर्ष और अनुभव साझा करने का अवसर भी दिया गया।

माताओं ने जब अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों, संघर्षों और परिवार को संभालने की अपनी कहानी सुनाई तो माहौल भावुक हो गया। कई माताओं की संघर्षगाथा ने उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं और यह एहसास कराया कि समाज में ऐसी अनेक माताएं हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने परिवार के लिए मजबूती से खड़ी रहती हैं।

कार्यक्रम में शदाणी दरबार संत मंडली के साथ समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक जीतू बड़वानी, पवन लोहाना, अमर चंदनानी, मनोहर चंदनानी, अमर गिदवानी, सचिन मेघानी, किशोर कुंदनानी, दिलीप बजाज, नरेश पंजवानी, राजा बजाज, चेतन तारवानी, अनिल मोटवानी, राजू तारवानी, शंकर लाल दानवानी, सुदेश मन्धान, दौलत पारप्यानी, राजेश गुरनानी एवं डॉक्टर एन.डी. गजवानी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सहयोग टीम के राष्ट्र प्रमुख चंदर देवानी के साथ अंकित रोहरा, नितिन मथानी, मनीष पंजवानी, राम भक्तानी, दिव्या आडवाणी, रीना तलरेजा, सिमरन चावला, सिमरन बजाज, रेखा भोजवानी, काजल विरानी, ज्योति चांदवानी, मंजू मलंग, मनीषा आडवाणी, रेखा तोलवानी, भावना शर्मा, पूनम चावला, प्रिया अमलानी एवं सुनीता अठवानी सहित सहयोग परिवार के सदस्य मौजूद रहे।

कार्यक्रम में रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ लकी ड्रॉ का आयोजन भी किया गया। मनोरंजक प्रश्नोत्तरी के माध्यम से उपस्थित लोगों से सवाल-जवाब किए गए और विजेताओं को उपहार प्रदान किए गए। पूरे कार्यक्रम में उत्साह, मनोरंजन और भावनात्मक जुड़ाव का अनूठा संगम देखने को मिला।

जरूरतमंद परिवारों की मदद का संकल्प

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पक्ष यह रहा कि माताओं की संघर्षगाथा सुनने के बाद समाजसेवा के लिए उपस्थित लोगों के मन में नई सोच पैदा हुई।

जीतू बड़वानी ने पांच जरूरतमंद परिवारों को राशन उपलब्ध कराने का संकल्प लिया। वहीं अमर चंदनानी ने यथासंभव गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता करने की घोषणा की।

इसी क्रम में चेतन तारवानी ने घोषणा की कि जिन जरूरतमंद परिवारों के पास भोजन की नियमित व्यवस्था नहीं है, वे उनके पास आकर अपना कार्ड बनवा सकते हैं। ऐसे जरूरतमंद परिवारों को बाकायदा हर महीने राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

सहयोग की पहल को मिली नई दिशा

सहयोग एक सामाजिक संस्था हमेशा समाज को जोड़ने और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न सामाजिक गतिविधियां करती रही है। संस्था की सबसे बड़ी कोशिश यही रही है कि समाज के अलग-अलग वर्गों को एक मंच पर लाकर एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनाया जाए।

‘हौसले वाली माँ’ कार्यक्रम में सहयोग परिवार इस उद्देश्य में बेहद सफल रहा। कार्यक्रम ने न केवल 39 परिवारों को सम्मान दिया, बल्कि समाज के सक्षम लोगों के भीतर जरूरतमंदों के लिए कुछ करने की भावना भी जगाई।

सहयोग टीम के राष्ट्र प्रमुख चंदर देवानी ने कहा कि इस कार्यक्रम के बाद सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि जीतू बड़वानी, अमर चंदनानी और चेतन तारवानी जैसे समाजसेवियों के मन में समाज के लिए जमीनी स्तर पर और अधिक कार्य करने की इच्छा जागी। उन्होंने तीनों को इस पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना का उदाहरण है।

चंदर देवानी ने कहा कि सहयोग परिवार आने वाले समय में समाजसेवा को और अधिक जमीनी स्तर तक ले जाएगा। जरूरतमंद परिवारों की वास्तविक समस्याओं को समाज के सामने लाया जाएगा और उनकी मदद के लिए एक मजबूत व्यवस्था तैयार की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सहयोग परिवार से जुड़े किसी भी व्यक्ति या परिवार को कोई समस्या है तो उसकी समस्या को सामने लाने और समाधान तक पहुंचाने के लिए ‘सहयोग मित्र मंडल’ बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल सहायता करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को सही सहायता, सही व्यक्ति और सही व्यवस्था से जोड़ना होगा।

कार्यक्रम के अंत में सहयोग परिवार ने सभी सम्मानित माताओं, अतिथियों, समाजसेवियों, सहयोगियों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया। ‘हौसले वाली माँ’ कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब समाज संवेदनशील होकर एक-दूसरे का हाथ थामता है, तो संघर्ष की कहानी प्रेरणा बन जाती है और सम्मान की एक छोटी-सी पहल किसी परिवार के जीवन में बड़ी उम्मीद जगा सकती है।

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