
अमर गिदवानी जी — एक ऐसा नाम, जिसे पहचान की जरूरत नहीं… पहचान खुद नाम से बनती है
रायपुर की सामाजिक और सार्वजनिक जीवन की दुनिया में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका परिचय देने के लिए बड़े-बड़े पदों और लंबी-लंबी उपाधियों की जरूरत नहीं पड़ती।
उनका नाम ही उनके व्यक्तित्व का परिचय बन जाता है।
ऐसा ही एक सम्मानित और आत्मीय नाम है — आदरणीय श्री अमर गिदवानी जी।
आज वे पंडित भगवती चरण शुक्ल वार्ड के पार्षद और रायपुर नगर निगम की एमआईसी के सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता और समाजसेवा से जुड़ी भूमिका लंबे समय से दिखाई देती रही है। वर्ष 2025 के नगर निगम चुनाव में वे वार्ड 57 से पार्षद निर्वाचित हुए और बाद में नगर निगम की एमआईसी में भी जिम्मेदारी मिली।
लेकिन सच कहूं तो अमर जी की पहचान केवल “पार्षद”, “एमआईसी सदस्य” या किसी संस्था के पद से नहीं है।
उनकी असली पहचान उनके व्यवहार, उनकी सक्रियता और लोगों के बीच उनके अपनत्व से है।
अमर जी उन लोगों में से हैं, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन को केवल पद हासिल करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि लोगों के बीच रहकर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का प्रयास किया। वार्ड में विकास कार्यों से लेकर सामाजिक गतिविधियों तक उनकी सक्रिय उपस्थिति दिखाई देती है। वार्ड 57 में विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन और जनहित से जुड़े कार्यों में उनकी भागीदारी भी दर्ज हुई है।
और शायद यही वजह है कि अमर गिदवानी जी को देखकर मन में एक बात सहज ही आती है—
“कुछ लोग पद से बड़े होते हैं और कुछ लोग पद को बड़ा बना देते हैं।”
अमर जी के व्यक्तित्व में मुझे यही खूबी दिखाई देती है।
सामाजिक जीवन में उनका जुड़ाव केवल अपने आसपास तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ सिंधी सेवा महापंचायत के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी वे समाज को जोड़ने, सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर चलने की भूमिका में दिखाई देते हैं।
सिंधी समाज के प्रति उनका जुड़ाव और सक्रियता उनके व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। समाज की बैठकों, सामाजिक आयोजनों और जनहित से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता लगातार देखने को मिलती है।
लेकिन किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी खूबसूरती उसका पद नहीं होती।
उसका व्यवहार होता है।
और अमर जी के बारे में जो बात सबसे ज्यादा दिल को छूती है, वह है लोगों से उनका जुड़ाव।
समाज में ऐसे बहुत से लोग होते हैं जो पद मिलने के बाद लोगों के बीच दिखाई देते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो लोगों के बीच रहते-रहते पद तक पहुंचते हैं।
अमर जी मुझे इसी दूसरी श्रेणी के व्यक्ति लगते हैं।
उनके लिए समाज केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
समाज में किसी की जरूरत हो, किसी कार्यक्रम में सहयोग की आवश्यकता हो, किसी सामाजिक पहल को आगे बढ़ाना हो या किसी अच्छे काम के लिए लोगों को एक मंच पर लाना हो—ऐसे अवसरों पर उनका सक्रिय रहना उनके सामाजिक सरोकार को दर्शाता है।
उनके व्यक्तित्व की सबसे खास बात यह है कि वे केवल अपने लिए नहीं सोचते।
उनकी सोच में “मैं” से ज्यादा “हम” दिखाई देता है।
और समाज को आगे बढ़ाने के लिए शायद इससे बड़ी सोच कोई दूसरी नहीं हो सकती।
राजनीति में लंबा अनुभव व्यक्ति को बहुत कुछ सिखाता है। लोगों को समझना, अलग-अलग विचारों के बीच संतुलन बनाना, समस्याओं को सुनना, परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना और सबसे महत्वपूर्ण—लोगों के साथ संबंध बनाए रखना।
अमर जी ने सार्वजनिक जीवन के इस लंबे सफर में निश्चित रूप से बहुत से उतार-चढ़ाव देखे होंगे। लेकिन आज भी समाज के बीच उनकी सक्रियता यह बताती है कि उन्होंने अपने सफर को केवल राजनीति तक सीमित नहीं रखा।
उन्होंने राजनीति के साथ समाज को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाया।
यही कारण है कि उनके व्यक्तित्व में एक अलग तरह की सहजता दिखाई देती है।
वे किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।
क्योंकि कुछ लोगों की पहचान उनका पद नहीं बनाता, बल्कि उनका काम उनका परिचय बन जाता है।
अमर गिदवानी जी के लिए भी यही बात कही जा सकती है—
“नाम के आगे पद लिखा जाए तो अच्छा लगता है,
लेकिन नाम के पीछे लोगों की दुआएं जुड़ जाएं तो जिंदगी सफल लगती है।”
और समाज में लोगों का विश्वास, सम्मान और अपनापन किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी होती है।
अमर जी की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल यह नहीं है कि वे पार्षद हैं या एमआईसी सदस्य हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि वे समाज के बीच पहचाने जाते हैं।
किसी व्यक्ति की वास्तविक लोकप्रियता का पैमाना यह नहीं कि उसके नाम के साथ कितनी उपाधियां लगी हैं। असली पैमाना यह है कि उसके जाने के बाद लोग उसके बारे में क्या कहते हैं।
और अमर जी जैसे व्यक्तित्व के लिए मैं बस इतना कहना चाहूंगा—
जिस व्यक्ति ने लोगों के सुख-दुख में खड़े होकर रिश्ते बनाए हों,
जिसने समाज के लिए समय दिया हो,
जिसने सार्वजनिक जीवन में लंबा सफर तय किया हो,
और जिसने अपने सामाजिक दायित्वों को लगातार निभाने का प्रयास किया हो,
उसकी पहचान किसी परिचय पत्र की मोहताज नहीं होती।
अमर गिदवानी जी का व्यक्तित्व मेरे लिए केवल एक जनप्रतिनिधि का व्यक्तित्व नहीं है।
वे एक ऐसे सामाजिक व्यक्ति हैं, जिनके भीतर समाज के लिए कुछ करने की इच्छा दिखाई देती है।
और ऐसे लोगों की जरूरत हर समाज को होती है।
मेरी दिल से यही कामना है कि अमर जी इसी तरह स्वस्थ रहें, सक्रिय रहें और समाज, शहर तथा जरूरतमंद लोगों के लिए अपना योगदान देते रहें।
उनके जीवन का आने वाला हर पड़ाव नई जिम्मेदारियां लेकर आए, लेकिन उन जिम्मेदारियों के बीच उनके व्यक्तित्व की सबसे खूबसूरत चीज—लोगों से जुड़ाव और समाज के लिए कुछ करने का जज्बा—हमेशा कायम रहे।
अंत में अमर जी के लिए मेरी तरफ से सिर्फ चार पंक्तियां—
पद आते हैं, पद जाते हैं,
लेकिन व्यक्तित्व हमेशा याद रहता है।
कुर्सी की पहचान कुछ समय की होती है,
पर अच्छे कर्मों की पहचान पीढ़ियों तक रहती है।
अमर गिदवानी जी,
आपकी पहचान किसी पद की मोहताज नहीं है…
आपकी पहचान आपके कर्म हैं,
आपका समाज के प्रति समर्पण है,
और लोगों के दिलों में आपके लिए जो सम्मान है—
वही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
आप यूं ही समाज के बीच मुस्कुराते रहें,
लोगों के काम आते रहें,
और रायपुर की सामाजिक दुनिया में
अपने कर्मों से अपनी अलग पहचान बनाते रहें।
सादर एवं आत्मीय सम्मान सहित —
चन्दर देवानी
संस्थापक — सहयोग एक सामाजिक संस्था



