
आदरणीय श्री अमर चंदनानी जी — कुछ रिश्ते पद से नहीं, दिल से बनते हैं
समाज में बहुत से लोग मिलते हैं।
कुछ लोग कार्यक्रमों में दिखाई देते हैं…
कुछ लोग मंच पर दिखाई देते हैं…
कुछ लोग अपनी उपलब्धियों के कारण पहचाने जाते हैं…
लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें किसी मंच, किसी पद या किसी परिचय की जरूरत ही नहीं होती।
उनका साथ ही उनकी पहचान बन जाता है।
मेरे लिए आदरणीय श्री अमर चंदनानी जी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं।
अमर जी का नाम जब भी सामने आता है, मेरे मन में सबसे पहले किसी पद या उपलब्धि का विचार नहीं आता। मेरे मन में सबसे पहले एक ऐसे व्यक्ति की तस्वीर आती है, जो सहयोग ग्रुप के हर अच्छे काम में साथ खड़ा दिखाई देता है।
मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात है।
क्योंकि किसी संस्था के साथ जुड़ना आसान है, लेकिन संस्था के उद्देश्य को अपना समझकर उसके साथ लगातार खड़े रहना आसान नहीं होता।
अमर जी ने यह साथ निभाया है।
सहयोग एक सामाजिक संस्था के कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति मेरे लिए केवल एक अतिथि की उपस्थिति नहीं होती। मुझे उसमें एक अपने व्यक्ति का साथ दिखाई देता है—ऐसा व्यक्ति, जिसे यह फर्क नहीं पड़ता कि मंच कितना बड़ा है, कार्यक्रम कितना चर्चित है या उसके नाम का कितना उल्लेख होगा।
उन्हें फर्क पड़ता है तो सिर्फ इस बात से कि—
“काम समाज के लिए है… तो हमें साथ रहना चाहिए।”
और शायद यही किसी भी समाजसेवी की सबसे खूबसूरत पहचान होती है।
अमर चंदनानी जी का सामाजिक जीवन भी इसी सोच की झलक देता है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचारों में उनका नाम छत्तीसगढ़ के सिंधी समाज की अनेक सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ लगातार सामने आता रहा है। सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर उन्होंने भाषा, संस्कृति और समाज की पहचान को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने की बात कही थी।
यह बात छोटी लग सकती है, लेकिन वास्तव में यह एक बड़ी सोच को दर्शाती है।
क्योंकि समाजसेवा केवल किसी जरूरतमंद को सामान दे देना नहीं है।
समाजसेवा का अर्थ अपनी जड़ों से जुड़े रहना भी है।
अपनी भाषा को बचाना, अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाना, अपनी परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना और समाज को एकजुट रखना भी सेवा का ही हिस्सा है।
अमर जी इन गतिविधियों में सक्रिय रूप से दिखाई देते हैं।
चेट्रीचंड्र जैसे सामाजिक और धार्मिक आयोजनों से लेकर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रमों तक उनका नाम और सहभागिता दिखाई देती है।
और यही निरंतरता किसी व्यक्ति के बारे में बहुत कुछ कहती है।
एक दिन सेवा करना कार्यक्रम हो सकता है,
लेकिन वर्षों तक सेवा से जुड़े रहना संस्कार होता है।
अमर जी के व्यक्तित्व की एक और खूबसूरत बात है—लोगों के बीच रहना।
समाज के बड़े आयोजनों में, सामाजिक बैठकों में, सेवा कार्यों में और जरूरतमंदों की सहायता से जुड़े प्रयासों में उनका योगदान दिखाई देता है। 2026 में आयोजित एक कांवड़ यात्रा के सेवा-संबंधी आयोजन में भी उनका नाम सक्रिय सहयोगियों में दर्ज हुआ।
लेकिन मेरे लिए अमर जी की सबसे बड़ी पहचान इससे भी अलग है।
वे साथ देने वाले इंसान हैं।
और आज के समय में यह गुण बहुत बड़ा है।
आजकल बहुत से रिश्ते आवश्यकता के अनुसार बनते और बदलते हैं।
जब काम हो तो लोग साथ दिखाई देते हैं…
जब मंच हो तो लोग साथ दिखाई देते हैं…
जब नाम हो तो लोग साथ दिखाई देते हैं…
लेकिन जो व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के अच्छे काम के साथ खड़ा रहे, वही वास्तव में अपना कहलाता है।
अमर जी मेरे लिए ऐसे ही अपने व्यक्ति हैं।
सहयोग के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी मुझे हमेशा यह विश्वास देती है कि समाज के लिए हम जो काम कर रहे हैं, उसमें हम अकेले नहीं हैं।
जब हौसले वाली माँ जैसा भावनात्मक कार्यक्रम हुआ और 39 परिवारों की संघर्षशील माताओं को सम्मानित किया गया, तब भी अमर चंदनानी जी उन समाजसेवियों और गणमान्य व्यक्तियों में शामिल रहे जिन्होंने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति से माताओं का हौसला बढ़ाया।
मेरे लिए यह सिर्फ एक घोषणा नहीं थी।
यह उस सोच की अभिव्यक्ति थी, जिसमें दूसरे के दर्द को अपना दर्द समझने की भावना होती है।
और यही भावना समाज को आगे लेकर जाती है।
किसी भी संस्था के संस्थापक के लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब संस्था से जुड़े लोग केवल कार्यक्रम देखने न आएं, बल्कि कार्यक्रम की भावना को समझें।
सहयोग का उद्देश्य भी यही है—
सम्मान देना,
लोगों को जोड़ना,
जरूरतमंदों की मदद करना,
समाज में सकारात्मक सोच पैदा करना
और उन लोगों को आगे लाना जो समाज के लिए कुछ कर रहे हैं।
अमर जी इस भावना के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं।
इसीलिए मैं उन्हें सिर्फ सहयोग ग्रुप का सदस्य या सहयोगी नहीं मानता।
मैं उन्हें सहयोग परिवार का अपना व्यक्ति मानता हूं।
और परिवार में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिन्हें शब्दों में समझाना मुश्किल होता है।
बस इतना पता होता है कि—
“यह आदमी अपने साथ है।”
अमर चंदनानी जी के साथ मेरा रिश्ता भी मेरे लिए कुछ ऐसा ही है।
हमारे सामाजिक सफर में बहुत से लोग जुड़ेंगे, बहुत से लोग आगे आएंगे, बहुत से लोग अपनी भूमिका निभाएंगे।
लेकिन जो लोग शुरुआती दौर से साथ चलते हैं, जो संस्था के उद्देश्य को समझते हैं और जो अच्छे काम के समय बिना बुलाए भी साथ खड़े हो जाते हैं—उनकी जगह हमेशा अलग रहती है।
अमर चंदनानी जी की जगह भी मेरे लिए ऐसी ही है।
उनकी खासियत यह भी है कि वे केवल अपने समाज की बात नहीं करते, बल्कि सामाजिक गतिविधियों में व्यापक सहभागिता दिखाई देती है।
सिंधी समाज के कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता इसका उदाहरण है
यह बताता है कि उनका सामाजिक जुड़ाव केवल किसी एक कार्यक्रम या एक संस्था तक सीमित नहीं है।
उनकी सोच समाज से जुड़ी है।
और समाजसेवा की सबसे खूबसूरत बात यही है कि जब कोई व्यक्ति किसी पद के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए काम करता है, तो धीरे-धीरे उसका नाम लोगों के दिल में जगह बनाने लगता है।
अमर चंदनानी जी के लिए मैं यही कहना चाहता हूं—
आपकी सबसे बड़ी पहचान आपका पद नहीं है।
आपकी सबसे बड़ी पहचान आपका व्यवहार है।
आपकी सबसे बड़ी ताकत आपका लोगों से जुड़ाव है।
और आपकी सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि आप अच्छे काम के समय साथ खड़े रहते हैं।
और इन शब्दों की कीमत किसी सम्मान पत्र, किसी स्मृति चिन्ह या किसी पद से कहीं ज्यादा होती है
सहयोग परिवार के साथ लगातार खड़े रहने के लिए…
समाज के लिए अपना समय देने के लिए…
जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील रहने के लिए…
सामाजिक आयोजनों में अपनी सहभागिता निभाने के लिए…
और सबसे बढ़कर—
एक अच्छे काम के लिए एक अच्छे साथी की तरह हमारे साथ रहने के लिए।
आपके कदम जहां भी जाएं, वहां किसी के चेहरे पर मुस्कान आए।
क्योंकि कुछ लोग संस्था से जुड़ते हैं…
और कुछ लोग संस्था की आत्मा का हिस्सा बन जाते हैं।
मेरे लिए अमर चंदनानी जी उन्हीं लोगों में से एक हैं।
अमर जी के लिए बस इतना कहना चाहूंगा—
“रिश्ते बहुत मिलते हैं जिंदगी में,
लेकिन हर रिश्ता अपना नहीं होता।
कुछ लोग बस मिलते हैं,
कुछ लोग साथ चलते हैं,
और कुछ लोग ऐसे होते हैं
जिनके साथ होने से सफर आसान हो जाता है।”


